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Ummul Kher के घर में बहता था नाले का पानी, बरसात में टूटी झुग्गी तो गरीबी से बाहर निकलने का ठाना; IAS बन पूरा किया सपना

Ummul Kher IAS Story: मन में अगर कुछ बड़ा करने की चाह हो तो जीवन में लाख मुसीबतें आ जाएं लेकिन इंसान अपने सपनों को पूरा कर के ही रहता है। उक्त बातें राजस्थान की रहने वाली Ummul Kher पर सटीक बैठती है। उनके जीवन में एक समय ऐसा भी था जब वह झुग्गी में रहती थी। लेकिन आज उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सिविल सर्विस की परीक्षा 420वीं रैंक पाकर परिवार की सभी परेशानियों को दूर कर दिया।

दरअसल, राजस्थान की Ummul Kher का परिवार शुरुआती दौर में काफी गरीब था। वह खुद भी पैर से विकलांग थी। ऐसे में हालत इतनी तंग थी कि उन्हें गुजर बसर करने के लिए दिल्ली जाना पड़ा। पूरा परिवार दिल्ली के हजरत निजामुदीन के पास एक छोटी सी झुग्गी में रहता था। झुग्गी भी ऐसा जहां बारिश में पानी और ठंड में तेज हवा हमेशा आती थी। ना ऊपर का छत पक्का था ना नीचे का फर्श। घर के पीछे ही नाला था जो अत्यधिक बहाव के चलते घर में पानी घुस जाता है। जैसे तैसे जिंदगी कट रही थी। मुसीबत का पहाड़ तो तब टूटा जब साल 2001 में वो झुग्गी भी टूट गई। जिससे एकबार के लिए Ummul Kher का पूरा परिवार बेघर हो गया था। ऐसे समय बारापुला से त्रिलोकपुरी में एक सस्ता घर लेकर रहने लगे।

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7वीं कक्षा से ही टयूशन पढ़ाती थी Ummul Kher

उस वक्त Ummul Kher के पिता जंक्शन पर सामान बेचा करते थे, जो घर बदलने पर वो भी छूट गया। ऐसे में अपने घर की बत्तर स्थिति को देखते हुए Ummul Kher ने ठान लिया की वह अपने परिवार को इस गरीबी से बाहर निकाल कर ही रहेगी। इसी सोच के साथ Ummul Kher ने त्रिलोकपुरी में ही बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। वे खुद उस वक्त 7वीं कक्षा में थी। लेकिन घर में पिता का हाथ बटाने के लिए Ummul Kher ने भी पैसे कमाने का जरिए खोज निकाला। वह उस वक्त एक बच्चे से 50 रूपए फीस लेती थी। जिसमें उन्हें रोजाना 2 घंटे पढ़ाना होता था।

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लेकिन मुसीबतों ने तब भी Ummul Kher का साथ नहीं छोड़ा। जब वह 8 वीं कक्षा में गई तो उनके परिवार के लोगों ने उन्हें आगे पढ़ने से मना कर दिया। उन्होंने समाज और परिवेश का हवाला देकर घरवाले यही कहते थे की 8वीं तक पढ़ना भी बहुत है। उनका कहना था कि तुम्हारा पैर खराब है, तुम क्या ही कर लोगी ज्यादा पढ़ लिखकर। तुम्हें घर के कामों में हाथ बटाना चाहिए, क्योंकि शादी के बाद तो वहीं सब काम आएगा।

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Ummul Kher को 10वीं में मिली स्कालरशिप

ऐसे में Ummul Kher ने परिवार वालों से बगावत लेते हुए खुद घर से दूर किराये का कमरा लेकर रहने लगी। यहां Ummul Kher सुबह स्कूल जाती और फिर स्कूल से आकर बच्चों को पढ़ाती। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और 10वीं में उन्हें एक चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा स्कालरशिप मिल गई। ऐसे में उनकी 12वीं तक की पढ़ाई छात्रवृति के जरिए पूरी हो गई। जैसे ही उन्हें थोड़ा बल मिला उन्होंने 12वीं में जीतोड़ मेहनत कर कक्षा में टॉप किया और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी में आवेदन किया और स्नातक की पढाई पूरी की।

JNU आने के बाद Ummul Kher ने खुद को रिलैक्स महसूस किया

लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी में उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए प्रैक्टिकल सब्जेक्ट सबसे बड़ी बाधा बन गया। क्योंकि प्रैक्टिकल के लिए शाम को रुकना होता है और अगर शाम को रुकना हुआ तो बच्चों को पढ़ाना बंद करना पड़ता। ऐसे में स्नातकोत्तर के लिए उन्होंने JNU में अलग विषय के साथ आवेदन किया और प्रवेश के साथ पढ़ाई शुरू कर दी। JNU में आने के बाद मुझे पढ़ाई को लेकर सभी सहूलियतें (सुविधाएँ) मिल गई जो पढ़ाई में बाधा बन रही थी।

वहीं, JNU आने के बाद Ummul Kher ने खुद को रिलैक्स महसूस किया। 2015 में Ummul Kher एक साल के लिए जापान रहकर फिर से आई तो लगा की यह सही समय है। Ummul Kher ने पीएचडी में दाखिला लेने के साथ ही जनवरी 2016 में आईएएस के लिए तैयारी शुरू की और अपने पहले ही प्रयास में सिविल सर्विस की परीक्षा 420वीं रैंक पास की।

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