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सिंगर सरदूल सिकंदर बायोग्राफी इन हिंदी

सिंगर सरदूल सिकंदर बायोग्राफी 

24 फरवरी 2021 यह वो दिन था जिसने म्यूजिक इंडस्ट्री का अपना किमती सदस्य खो दिया. पंजाबी सिंगर सरदूल सिकंदर अब इस दुनियां को छोड़कर जा चुके हैं.

सरदूल मौहाली के फोर्टीस हाँस्पीटल में भर्ती थे. वो कोरोना पाँजीटीव पाये गये थे. उसके बाद उनकी तबियत लगातार बिगड़ती चली गई और 60 बर्ष की उम्र में अपनी यादो में हमें सदा सदा के लिए छोड़कर चले गये. उनका किडनी का ट्रान्सप्लांट भी हुआ था. सरदूल सिकंदर के चले जाने के बाद बाँलीबुड़ में बहुत याद की गई. सरदूल पंजाबी दुनियां के अद्वुतीय गायक थे.

 कैसे सरदूल सिकंदर पायलट से बने थे सिंगर ?

पंजाब के जिला फतेहगढ़ में एक छोटा सा गांव खेड़ी नौद सिंह मे 15 जनवरी 1961 सागर मस्ताना के घर मे एक लड़के का जन्म हुआ. जिसका नाम रखा गया सरदूल सिकंदर. सागर मस्ताना के तीन बेटे गम्दूर अमर और भरपूर मे से सरदूल सबसे छोटे थे.
गम्दूर अमर सूफी सिगंर थे तो भरपूर का सम्बंध तबला बादन से था. उस समय सागर मस्ताना महान तबला बादको में से एक माने जाते थे. संगीत की क्रिएटीविटी को सुरो में ही नहीं उतारते थे बल्की नये नये तबले बनाने की कोशिश में भी लगे रहते थे. इसी कोशिश में उन्होने अलग तरह का तबला इजात भी किया. जिसे बारिक बांस की लकड़ी से भी बजाया जा सकता था.
singer sardool sikandar
Sadool Sikandar
कहना गलत नही होगा कि सरदूल को संगीत विरासत में मिला. उनकी कई पुस्ते संगीत के प्रति खुद को समर्पित कर चुकीं थी. लेकिन सागर मस्ताना यह बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि उनका छोटा बेटा अपनी पूरी जिंदगी संगीत के नाम करें. उस समय Classical संगीत का सिकुड़ा हुआ scope था आज की तरह न इतने संसाधन थे और न इतना पैसा. इसी वजह से सागर मस्ताना सरदूल सिकंदर को कुछ और करते हुए देखना चाहते थे मगर तकदीर को कुछ और ही मंजूर था.
खुद सरदूल संगीत को प्यार करते थे लेकिन संगीत की तरफ इतना रूझान नहीं था. वो बड़े होकर पायलट बनना चाहते थे.
सरदूल के पिता बच्चो को संगीत सिखाते थे लेकिन इसकी इजाजत सरदूल को नहीं थी कि वो बच्चो में बैठकर संगीत सीख सकें. सुरो के अलाप सरदूल को संगीत की ओर आकर्षित करने लगे. इसी जिज्ञासा को तृप्त करने का एक नया जुगाड़ सरदूल ने निकाला. जिसे वो दिवार की आड़ लेकर सुरो को सीखने की कोशिश करते. यह सिलसिला कई दिनो तक चलता रहा. एक दिन उनके पिता ने नई सरगम सिखाई. उन्होने उस सरगम को दोहराने के लिए बोला लेकिन एक भी बच्चा उसे सही से नहीं दोहरा पाया. सबके जाने के बाद सरदूल उस सरगम को खुद में अकेले दोहराने लगे. तभी उनके पिता की उन पर नज़र पड़ी. सरदूल को लगा कि अब तो उनकी जमकर पिटाई होगी ! पर ऐसा नहीं हुआ.
पिता ने वही सरगम सरदूल से गाने को बोला. सरदूल ने सरगम डरते-डरते गाया. इसके बाद नन्हे सरदूल को पिता ने गोद में उठा लिया. क्योकी सरदूल ने बिना किसी रियाज के उस सरगम को बिल्कुल सही गा दिया था.
पिता को बेटे का हुनर नजर आ रहा था इसके बाद सरदूल को संगीत सीखने की इजाजत दे दी.

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सिंगर सरदूल सिकंदर को क्यो खाने पड़े पुलिस के ड़डे ?

ऋषि कपूर की फिल्म ‘कर्ज’ तो आपको भलिभांति याद होगी. उस समय की काफी हिट फिल्म थी. इस फिल्म एक गाना था ‘ओम शांति ओम… याद कीजिए ऋषि कपूर मोंटी के किरदार में stage पर performance कर रहें हैं और उनके पीछे बड़ा सा बैंनर HMV लगा है.
HMV कम्पनी
HMV बैनर, फिल्म-कर्ज
इस HMV का सरदूल की जिंदगी में अहम रोल था.
HMV उस दौर की बहुत बड़ी म्यूजिक कम्पनी थी. जिस सिंगर को HMV ने साइन कर लिया उसकी जिंदगी में चार चाँद लग गये. सरदूल भी ऐसे ही सिंगर की लिस्ट में अपना नाम देखना चाहते थे. पर इसके लिए उन्हे दिल्ली के Head office में जाना पडता. और दिल्ली जाने के लिए चाहिए पैसे? जो कि उन पर उस समय नही थे. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. वो दोस्तो से भी उधार लेते तो भी इतना किराया ना जुटा पाते. तो उन्होने एक जुगाड़ निकाला.
न्यूज पेपर वाली बेन दिल्ली जाती थी. सरदूल ने सोचा क्यो न उसी से अपना सफर तय किया जाये. बस के मुकाबले कम पैसे देने पड़ेगें. लेकिन न्यूज बेन की एक समस्या थी कि यह सुबह 4:30 बजे दिल्ली पहुँच जाती थी और HMV का आँफिस 10:00 बजे खुलता था. इस बीच सरदूल किसी पार्क में जाकर सो जाते थे.
पार्क सोने में भी समस्या थी कि एक तो कपड़े गंदे हो जाते थे. जिसकी वजह से उन्हे HMV के आँफिस से वापस लौटा दिया जाता. वही सोये हुए लोगो को पुलिस ड़डो से पीटती थी. पुलिस का कंहना था कि तुम रात को यहां सोते हो और दिन में चोरियां करते हो.

सिंगर सरदूल की पहली एल्बम का सफर

सरदूल बेहतरीन गले के ही धनी नहीं थे. ऐसे ही एक बार वो करतार अमला के स्टूडियों में अपना एल्बम रिकोर्ड कर रहे थे. रिकोर्डिग पूरी करके बाहर निकले और कुछ ऐसे ही गुन-गुनाने लगे. उनकी आवाज अंदर बैठे म्यूजिशियन के कानो में पड़ी तो वो तुरंत उठकर बाहर आये. उन्होने सरदूल से पूंछा कि अभी तुम गा रहे थे ? सरदूल को लगा कि अंदर रिकोर्डिग चल रही थी उनके गाने से रिकोर्डिग में दखल पड़ गया.
म्यूजिशियन सीधे उन्हे ‘चिरंजित अहूजा’ के पास ले गये. म्यूजिशियन ने सरदूल के बारे में चिरंजित को बताया. चिरंजित ने तुरंत HMV के मैनेजर को बुलाकर कहा,” आप एक बार इस लड़के को चांस दीजिए.”
मैनेजर ने यह कहते हुए साफ मना कर दिया कि नये लड़के के साथ हम रिस्क नहीं ले सकते. इसके बाद चिरंजित अहूजा ने सरदूल का एल्बम खुद रिकोर्ड करवाया.
उस एल्बम का नाम था ‘रोडवेज दी लारी.‘ एल्बम रिलीज होते ही इसके गाने लोगो के जुबान पर चढ़ गये. एल्बम हिट साबित हुई. इसके लिए सरदूल को 10000 रूपये मिले. आप सोच रहे होगें कि सरदूल हिट हो गये होगें. उनके प्रशंशक बड़ गये होगें. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वजह उनकी आवाज में Variation था. ज्यादातर लोगो को लगता था कि यह गाने किसी जमे हुए सिंगर ने रिकोर्ड किये हैं किसी नये सिंगर ने नहीं. लोगो का यह भ्रम भी टूटा. कब ?
जब सरदूल दूरदर्शन जलंधर के एक प्रोग्राम में Performence देने पहुँचे. लोग अब जान गये कि ये गाने किसके हैं. अब सरदूल को पीछे मूड़कर देखने की जरूरत नहीं थी. आगे चलकर सरदूल के लिए एल्बम क्लासिक बनने लगे. अपने सिंगर करियर में सरदूल ने 27 से ज्यादा एल्बम रिकाॅर्ड की.

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सरदूल सिकंदर ITA अवार्ड

इण्डियन टेलीविजन अकादमी द्वारा ‘सर्वश्रेष्ट गायक’ से सम्मानित किये जा चुके हैं.

सरदूल सिकंदर का Acting में करियर

गायकी में अपने कदम जमाने के बाद उन्होने अपनी दूसरी पारी की शुरूआत एक्टीग में की. सरदूल ने सन् 1991 में ‘जग्गा डाकू’ फिल्म से करियर शुरूआत किया. बतौर एक्टर उनकी last मूवी 2014 में आई ‘पुलिस इन पाॅलीबुड‘ थी.

प्रेरणादायक लवस्टोरी

सरदूल की जिंदगी का एक और दिलचस्प किस्सा है उनकी लव स्टोरी का. 30 जनवरी 1993 को सरदूल की शादी सिंगर ‘अमर नूरी’ से हुई. दोनो ने लम्बे समय तक साथ गाने गाये. इसी दौरान दोनो में प्यार हुआ. उसके बाद दोनो ने एक दूसरे को जीवन साथी के रूप में जुड़कर अपने जीवन की नई शुरूआत की.
Amar noori
Amar noori wife of sardool sikandar

 

अमर नूरी द्वारा पार्श्व गायक के रूप में भी काम किया है. उनकी कुछ उल्लेखनिय फिल्म निम्न हैं:
Jee aayan nu/जी आयान नू (2003)
Sahid-e-mohabbat panjabi film/शाहिद-ए-मोहब्बत पंजाबी फिल्म
Dil apna panjabi/दिल अपना पंजाबी (2006)
Mel karade rabba/मेल करा दे रब्बा (2010)
Tere ishq nachaya/तेरे इश्क नच्या (2010)
Pata nahi rabba kehdeyan rangan ch raazi/पाता नहीं रब केहदें रंगन च राज़ी (2012)
Dady cool munde fool/डैडी कूल मुड़े फूल (2013)
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सिंगर सरदूल सिकंदर के बच्चे

Children of Sardool sikander

सरदूल सिकंदर के दो बेटे हैं –
1- अलाप सिकंदर
2- सारंग सिकंदर
alaap and sarang with father sardool sikander
Alaap and sarang with sardool sikandar
दोनो ही बेटो को संगीत में बहुत रूचि है. अलाप सिकंदर अपना पूरा जीवन संगीत को समर्पित करना चाहते हैं उनका मानना है कि संगीत में कैसे नये नये अविष्कार किये जा सकते हैं. आज की युवा पीढी डिजिटाइलेजशन युग में जी रहीं है. इसलिए युवा पीढ़ी को संगीत के प्रति आकर्षित कर पाना किसी चुनौती से कम नहीं.
सारंग सिकंदर भी अपने माता-पिता तथा बड़े भाई की तरह संगीत में रूचि रखते हैं. ये नये नये गाने और धुन बनाने में समय व्यतीत करते हैं. यह एक नये संगीतकार के रूप में खुद को उभारना चाहते हैं. सारंग अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते हैं.
अब बात करते है उनकी पत्नी अमर नूरी की. अमर नूरी का जन्म 23 मई 1967 को पंजाब के रोपड़ के गाॅव रंगेलपुर में हुआ था. नूरी के पिता रोशन सागर एक गायक थे. सरदूल की तरह अमर नूरी ने भी छोटी उम्र से म्यूजिक सीखना शुरू कर दिया था. 9 साल में उन्होने गाना शुरू किया और 13 साल की उम्र में रिकोर्डिग शुरू की. आगे चलकर गायकी की दुनियां में खूब नाम कमाया.
दोनो पति पत्नी ने मिलकर कई सारे अंतरराष्ट्रीय म्यूजिक टूर किये. दोनो की जुगलबंदी ऐसी कि दोनो के सुर लय में दौड़ते थे. लेकिन दोनो की कैमिस्ट्री सिर्फ स्टेज तक ही सीमित नहीं थी बल्कि रियल लाइफ में भी उतनी ही मजबूत थी. कुछ साल पहले इसका एक नमूना भी देखने को मिला. दरअसल सरदूल की एक किडनी में खराबी की वजह से ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी. यानि किसी को अपनी किडनी देनी पडेगी ऐसा डाँक्टर ने बताया.
कई जगह दोस्तो और रिश्तेदारो में तलाशा गया. लेकिन सब ने चुपचाप दूरी बना ली. ऐसे मुश्किल वक्त में करीबीयों का ऐसा बर्ताव देखकर सरदूल तनाव में आ गये. उन्हे चिंता होने लगी कि अब क्या होगा ? अमर नूरी ने उन्हे हिम्मत दी. उन्होने कहा कि जब तक वो हैं तब तक उन्हे कुछ नही होने देगी और उन्होने अपनी बात साबित करके भी दिखाई.
सरदूल का ब्लड़ A पाॅजीटिव था वही अमर का ब्लड O पाॅजीटिव था. O ग्रुप वाले किसी भी पाॅजीटिव ब्लड ग्रुप वाले को अपना खून दे सकते हैं. अमर को पूरा भरोसा था कि जहां दिल मिल सकते है तो क्या किडनियां नहीं मिलेगी? सुनने में थोडा फिल्मी लगेगा लेकिन उनका यह विश्वास सही साबित हुआ. सरदूल की कीडनी अमर की कीडनी से मैच हो गई और अमर ने अपनी किड़नी सरदूल को दे दी.
सरदूल को जानने वाले लोग यही कहते है कि वो एक जिंदादिल इंसान थे. वो हमेशा जमीन से जुडे रहे. शायद इसीलिए उन्होने लोगो के दिलो में जगह बनाई. सरदूल इस दुनियां को छोड़कर एक ऐसा रिक्त स्थान छोड़ गये जिसे भरना मुश्किल है.
दोस्तो!! सिंगर सरदूल सिकंदर की बायोग्राफी इन हिंदी उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आई होगी. यदि आपके पास कोई प्रेरणादयक कहानी है जो पूरी दुनियां में पहुँचाना चाहते है तो आप हमें Merajazbaamail@gmail.com पर मेल कर सकते हैं.
                                                         धन्यवाद!!

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