जरा हटके

कर्मों का फल Inspristional Story in Hindi

एक बार एक राजा अपनी जन्म कुण्ड़ली पढ़ रहा था । तभी उस राजा के मन में अचानक ख्याल आया कि जिस समय मेरा जन्म हुआ ठीक उसी समय संसार में अन्य कई लोगों का भी जन्म  हुआ होगा । परन्तु वह सभी राजा क्यों नहीं बनें ?
अब यह सवाल राजा के मन में बार-बार आ रहा था पर इसका जवाब कहीं नहीं मिल पा रहा था । 
अगले दिन राजा ने राज्य के सभी बड़े विद्वानों को अपनी सभा में आनें का आमत्रंण दिया । राज्य के  सभी महान विद्वान एकत्रित हुए । सभी आश्चचर्य चकित थे कि अचानक राजा ने बैठक क्यों बुलाई हैं ? 
अब सभी की निगाहें राजा की तरफ थी । राजा सभी का अभिनदंन स्वीकारते हुए बोले, ‘ मैं आप सभी लोगों से जानना चाहता हूँ कि जब मेरा जन्म हुआ ठीक उसी समय अन्य लोगों का भी जन्म हुआ होगा परन्तु वे सभी राजा क्यों नहीं बनें ?
राजा का सवाल सुनकर सभी चौक गयें किसी के पास कोई ठीक जवाब नहीं था । तभी एक बुजुर्ग विद्वान बोलें, ‘ राजन् ! तुम्हारे इस सवाल का जवाब जगंल में एक साधू रहते हैं वहीं इसका ठीक जवाब दे सकते हैं । 
अगले दिन राजा उसी जगंल की ओर चल पड़ा । काफी दूर चलने के बाद राजा को एक छोटी कुटियाँ दिखाई दी । राजा के मन में खुशी की लहर दौड़ गई कि अब उसे अपने सवाल का जवाब मिल जाऐगा । 
राजा कुटियाँ के पास पहुँचा तो देखा वह साधू आग के अगांरे खा रहा हैं । यह देखकर राजा चौक गया । फिर भी हिम्मत जुटाते हुए राजा साधू के पास पहुँचा और साधू को बोला, ‘ हे, मुनिवर ! मैं आपसे एक सवाल जानना चाहता हूँ । कि जब मेरा जन्म हुआ ठीक उसी समय संसार में और भी लोगों का जन्म हुआ होगा । परतुं वह सभी राजा क्यों नहीं बनें ?
साधू ने राजा की ओर देखते हुए जवाब दिया, ‘ तुम्हारे इस सवाल का जवाब आगे एक साधू हैं वहीं देगें ।’
राजा को अपना अनादर महसूस हुआ मगर उसे अपने सवाल का जवाब जानना था इसलिए वह दूसरे साधू की तलाश में निकल पड़ा । 
काफी दूर चलने के बाद उसे दूसरा साधू दिखाई दिया । राजा को बड़ी प्रसन्नता हुई कि अब वह जान पायेगा कि क्यों सभी राजा नहीं बने ?
राजा उस साधू के नजदीक पहुँचा तो देखा वह साधू मिट्टी खा रहा हैं । यह सब देखकर राजा को बड़ी घृणा हुई । 
फिर भी राजा को तो अपने सवाल का जवाब जानना था ।इसलिए सर्वप्रथम राजा ने उस साधू को प्रणाम किया । जैसे ही राजा ने उस साधू को प्रणाम किया वह साधू क्रोधित होते हुए बोला, ‘ चले जाओं तुम मेरी नज़रो के सामने से …….
मैं तुम्हारी किसी बात का जवाब नहीं देना चाहता । राजा को बड़ी हताशा हुई । राजा वापस जाने लगा । तभी वह साधू बोला, ‘ तुम्हारे सवाल का जवाब पास के गाँव में एक लड़का हैं । वहीं तुम्हारे सारे प्रश्नों का जवाब देगा । जल्दी जाओं वह अपनी आखरी सांसे गिन रहा हैं ……। 
राजा कुछ भी नहीं सोच पा रहा था कि आखिर उसके साथ हो क्या रहा हैं ? एक के बाद एक नई कड़ियाँ अनायास ही  जुड़ती जा रहीं हैं । 
राजा उसी गाँव की तरफ चल दिया । पूँछते हुए राजा उसी लड़के के पास पहुँच गया । 
राजा ने लड़के को देखा और लड़के ने राजा को देखा । राजा कुछ पूँछता उससे पहले वह लड़का बोला, ‘ पिछले जन्म में हम चार भाई थे । चारों एक बार एक जगंल में रास्ता भटक गयें थे । कई दिन हम भटकते रहें …..हमारा आटा भी खत्म होने पर आ गया था । उस दिन कुछ ही आटा बचा हुआ था । उस आटे की रोटियाँ बनाकर जैसे ही खाने बैठे । वहाँ एक बाबा आ गयें और उन्होनें हमसे खाना खाने का अनुरोध किया । यह सुनकर बड़ा भाई बोला , ‘ यह रोटियाँ हम तुम्हें दें देगें तो हम क्या अगांरे खायेगें’ ?
दुसरे ने कहा, ‘ हम क्या मिट्टी खायेगें’ ? 
मैने भी इसी प्रकार रोटियाँ देनें से मना कर दिया । आपने अपनी रोटियाँ उठाकर उस बाबा को दें दी । 
आप जो दो साधूओं से मिलकर आये हैं वह हमारे ही पिछले जन्म के भाई हैं जो एक मिट्टी खा रहा था तो दुसरा अगांरे खा रहा था तीसरा आप तो मुझे देख ही रहे हैं । चौथे आप हैं जो कि आपने रोटियाँ उस बाबा को दे दी । उसी की वजह से आपको अपनी करनी का फल मिला हैं । 
राजा को अपने सवाल का जवाब समझ आ गया था । 
दोस्तों, हम जैसे कर्म करते हैं, ठीक उसी प्रकार हमें फल मिलता हैं । आज आप जो भी हैं वह अपने कर्मों की वजह सेे हैं और जो भी भविष्य में होगें वह भी अपने कर्मों की वजह से ही होगें । इसलिए ‘करो कुछ ऐसा कि दुनियाँ बनना चाहें आपके जैसा’ ।
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