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Five reasons we shouldn’t avoid emotional pain in hindi

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दोस्तो ! आज की पाॅस्ट Five reasons we shouldn’t avoid emotional pain in hindi मे हम जानेगे कि क्यो भावनात्मक दर्द से नहीं बचना चाहिए ? हम सभी लोग खुश रहना चाहते हैं, है ना? चाहे हमारा Proffetion कोई भी हो. हम सभी लोग रोज़मर्रा के जीवन में सकारात्मक और अच्छे कार्यो की ओर ध्यान केंद्रित करते हुए हमे हमेशा भगवान का धन्यवाद करना चाहिए . अपने दिमाक को जागरूक व प्रज्ञावान की ओर प्रोत्साहित करना चाहिए. हमे अपने नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण करने का कौशल सिखाना चाहिए.
आप सोच रहे होगें कि हमे खुश और स्वस्थ्य रहने के लिए भावनात्मक दर्द (emoyional pain ) या नकारात्मक भावनाओं को खत्म करना चाहिए या इससे बचना चाहिए ? जाहिर सी बात है, नकारात्मक भावनाएं अप्रिय होती हैं. वे हमें हमारे निर्णय में बांधा उत्पन्न करती हैं. हमे ऐसा महसूस होने लगता है कि सभी पहलू हमारे नियंत्रण से बाहर हैं. ऐसी स्थिति से बचने के लिए आप चीजो को Ignor करने लगते हैं या उन्हे छोड़ने की कोशिश करते हैं.
वास्तव में आज आपको इसके ठीक विपरीत बताने जा रहे हैं. जब आप भावनात्मक दर्द से बचने के लिए अपने आस-पास भावनात्मक दीवारों का निर्माण करते है. तब आप अपना अक्सर नुकसान करते है.
आप पढ़ रहे है Five reasons we shouldn’t avoid emotional pain in hindi भावनात्मक दर्द से बचने के पाँच कारण जिनसे हमे बचना चाहिए.
 भावनात्मक दर्द से बचने के लिए यहां 5 कारण दिये गये हैं. एक-एक करके समझने की कोशिश करते हैं. :-
 1. सभी भावनाओं की भूमिका होती है.
क्या आपको 2015 की फिल्म “Insite out” याद है? अगर आप इसे याद करते हैं, तो कहानी ‘रिले’ नाम की एक 12 वर्षीय लड़की के बारे में है. उसके पिता एक नए शहर में रहने लगते हैं, इसलिए परिवार को स्कूल, घर और दोस्तों से दूर जाना पड़ता है, जिन्हें वह हमेशा से जानती है. फिल्म का अधिकांश हिस्सा रिले के दिमाग में पात्रों के रूप में अपनी भावनाओं के साथ पेश करता है.
फिल्म की शुरुआत में, ‘जॉय’ प्रभारी हैं. वह स्पष्ट रूप से शो चलाती है. खुशी सबसे मजबूत और सबसे शक्तिशाली भावना है, जो अक्सर दुःख को मन के कौने में बैठने के लिए भेजती है ताकि लड़की की यादों और अनुभवों को “धूमिल” न किया जा सके. रिले नकारात्मक विचारों और भावनाओं के साथ संघर्ष करती है और उन चुनौतियों का सामना करना शुरू करती है जो अकेले नहीं सुलझ सकते.
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फिल्म का संदेश हमें सिखाता है कि सभी भावनाओं का एक स्थान है. यह एकीकरण और सहयोग के महत्व पर बल देती हैं. आनंद ही पर्याप्त नहीं है. दुःख की हमारे जीवन में एक अलग भूमिका और जगह होती है, जैसे :- गुस्सा, घृणा और भय. जब हम इन सभी भावनाओं का अपने अंदर एक अलग हिस्सा बना लेते है जो जीवन जीने के लिए मगत्वपूर्ण तो नहीं है लेकिन इनके बिना हम खुशी का महत्व भी नहीं समझ पाते. तो इसलिए जब भी आपको कहीं कोई परेशानी में दिखे तो उसके दु:ख को अपना दु:ख समझकर बिना किसी भेद भाव के मदद करने का प्रयत्न करें. यह जरूरी नहीं की आप उस स्थिति तक मदद कर पाये जितनी की आवश्यक है लेकिन उतनी जरूर करें जितनी आपकी क्षमता है.
               
 2. दुख खुद की अपेक्षा हमारे रिश्तो के भावनात्मक दर्द के बारे में अधिक है.
 मनोवैज्ञानिक और बौद्ध ध्यान विशेषज्ञ, तारा ब्राच ने इसे खूबसूरती से व्यक्त किया था.
 “दर्द गलत नहीं है. दर्द को गलत रूप में प्रतिक्रिया करने से अयोग्यता की भावना पैदा होती है. जिस क्षण हम मानते हैं कि कुछ गलत है, हमारी दुनियाॅ सिकुड़ जाती है और हम दर्द से निपटने के प्रयास में खुद को खो बैठते हैं.”
जब हम अपने शारीरिक और भावनात्मक दर्द को गलत समझने लगते हैं तो हमारी भावनाओ को ठेस पहुँचती है, इससे हमे बड़ा दु:ख पैदा होता हैं. ऐसे में हम लोगो को गलत React करने लगते हैं. हम दूसरो की Feelings को heart करने लगते हैं. ऐसा करके हम खुद को शांति का अनुभव पाना चाहते हैं जबकि सामने वाला व्यक्ति आपकी मदद के लिए ही आया था लेकिन आपने उसे heart करके ये जता दिया कि आपको उसकी कोई जरूरत नहीं. यह तब होता हैं जब आप भावनात्मक दर्द (emotional pain )  से गुजर रहें होते हैं.
 3. हम कब आगे बढ़ते है जो हमें मजबूत बनाता है ?
 व्यक्तिगत विकास अक्सर भावनात्मक दर्द से होता है. जैसा कि बौद्ध कहावत है:
 “कमल का फूल सबसे गहरे और सबसे मोटे मिट्टी से खिलता है.”
यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि अंधेरा और दर्द, विकास और अनुभव सीखने के लिए एक उत्प्रेरक हो सकता है.
Ex: जब हम वास्तव में शारीरिक नुकसान मे होते हैं तो हम डर का सामना करने लगते हैं. और खुद के लिए हम सतर्क हो जाते हैं कि हमें सुरक्षा प्राप्त करने की आवश्यकता है. शारीरिक रूप से या भावनात्मक रूप से किसी और को चोट पहुंचाने के बाद पछतावा या अपराधबोध महसूस करना हमें अगली बार एक समान स्थिति से सामना करने के लिए अलग तरह से सोचने के लिए प्रेरित करता है.
आप पढ़ रहे हैं Five reasons we shouldn’t avoid emotional pain in hindi
वास्तव में जब अपराध को नकारात्मक रूप से देखा जाता है, तो अपराधबोध हमें स्थिति पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है और हमें नुकसान की भरपाई करने या संशोधन करने के लिए प्रेरित कर सकता है. क्रोध एक अलग भावना है, जो इसमें सहायक हो सकता है कि यह अनुचित खतरों के खिलाफ अधिक सक्रिय होने के लिए जगह बनाता है. क्रोध हमें एक बड़े उद्देश्य के लिए कार्रवाई करने के लिए दूसरों से जोड़ता है.
 4. यदि आप नकारात्मकता से बचते हैं, तो आप सकारात्मकता की सराहना करने में कम सक्षम हैं.
 यदि हम भावनात्मक दर्द से बचते हैं, तो हम वास्तविक महसूस की गई भावनाओं के साथ-साथ सराहना और रूचि लेना कम करते हैं. पुस्तक, “upside of your darkside” के लेखक Todd kashdan और Robert Biswas diener कहते हैं:
“आप अनजाने सुख, अर्थ, धैर्य, जिज्ञासा, परिपक्वता, ज्ञान और व्यक्तिगत विकास के बिना नकारात्मक भावनाओं से छुटकारा नहीं पा सकते हैं. जब आप नकारात्मकता को खत्म करने के लिए चुनते है. तब आप सकारात्मकता को भी खत्म कर देते है.”
जब हम भावनात्मक अनुभवों की पूरी श्रृंखला का अनुभव करने में सक्षम होते हैं, तब हम भावनात्मक चपलता और लचीलापन प्राप्त करने में बेहतर होते हैं. हम नकारात्मक पहलुओं को सुलझाने में ज्यादा सक्षंम हो जाते हैं.
 5. एक रबर बैंड, जिसे हम दूर धकेलते हैं मगर वह हमेशा मजबूत होकर वापस आती है.
कुछ ऐसी समस्याएं होती हैं जिन्हे हम क्रोध में आकर या अहंम में आकर उनसे छुटकारा पाने की कोशिश करते है जो कि हमें उतनी ही तेजी से हमें वापस प्रतिउत्तर में प्राप्त होती हैं. आपकी नम्रता प्रतिकूल लोगों के लिए “रस्सी से दिवार घिसने के समान होगी लेकिन एक दिन जरूर घिसेगी.” कुछ ऐसा है जो हम एक मनोचिकित्सक के रूप में अभ्यास के दौरान प्राप्त करते है. जब भावनात्मक दर्द को नीचा, दूर या पहचाना नहीं जाता है, तो यह बढ़ता है. हम खुद को जानने का एक तरीका खोजते है और आत्म-विनाशकारी तरीकों को खोज लेते हैं. किसी भी भावनात्मक दर्द से बचने या ठीक करने की कोशिश अक्सर असफल होती है.
जब हमारी मृत्यु हो जाती है तो हमे यह स्वीकार करना पड़ता है कि हम सभी कठिन विचारों, भावनाओं और नकारात्मक भावनाओं को ले जाते हैं, भावनात्मक दर्द आपको परिभाषित नहीं करता है. यही आपके पहचान की कुंजी है. यह कुछ ऐसा है जिसे आप अनुभव कर रहे होते हैं, न कि आप कौन हैं? यह एक सूक्ष्म, लेकिन महत्वपूर्ण अंतर है.
हम जानते हैं कि ये Five resons we shouldn’t avoid emotional pain को जानकर आप अपने जीवन में  नकारात्मक भावनाओं को व्यक्त करने की एक निरंतर और व्यापक कला सीखने में सक्षंम होगें.
उन भावनाओं से बचना जवाब नहीं है. यह स्वीकार करना कि हम अपने मनोवैज्ञानिक अनुभवों से परिभाषित नहीं हैं, स्वस्थ संतुलन की कुंजी है.

दोस्तो ! उम्मीद करता हूँ आपको पाँस्ट पसंद आई होगी. आप ऐसे ही अपने प्यारे संदेश कमेंट बाँक्स के जरिये भेजते रहें. आप अपने बड़ो का ख्याल रखें. आस-पास साफ सफाई रखें. जानवरो को प्यार करें. जीवन में नैतिकता को बनाये रखें. क्योकी यही जीवन का आधार है. यदि आपके पास कोई प्रेरणादायक कहानी, कविता है तो आप हमारी मेल आई डी Merajazbaamail@gmail.Com पर भेज सकते हैं. हमसे जुड़े रहने के लिए आपका तहेदिल से शुक्रियाँ.

                                                              Thanks !

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