जरा हटके

आप Unique हैं | None like you | Inspirational Story in Hindi

एक जगंल के रास्ते साधू जा रहें थे. तभी अचानक उनके चहरें पर पानी की एक बूँद  गिरी. साधू ने अपने ऊपर देखा तो एक कौआ पेड़ पर बैठा रो रहा हैं.
साधू ने उस कौआ से पूँछा,” अरे कौआ ! तुझे क्या दु:ख हैं ? तू क्यों आँसू बहा रहा हैं ? तेरी ऐसी कौन सी पीड़ा हैं, जिसे लेकर तू परेशान हैं ?”
कौआ बोला, ” हे भगवन ! मेरी एक समस्या हो तो बताऊँ ! मेरे पास तो समस्याएं ही समस्याएं हैं.
और कौआ एक – एक कर साधू को अपनी समस्याएं गिनानें लगा.
अरे बोलता हूँ तो लोग अपनी नज़रे फेर लेते हैं, कोई मुझे सुनना पसंद नहीं करता. न मेरा रंग अच्छा, ये कोई रंग हैं काला …..मुझे मरे हुए लोगों के श्राद्ध में खिलाया जाता हैं.”
साधू बोले,” तो तूम मुझसे क्या चाहतें हो ?
कौआ बोला, ” भगवन ! बस एक बार हंस बना दीजिए.”
साधू बोले,” एक शर्त हैं, पहले तुम हंस से मिल के आओं. फिर तुम जो कहोगें, मैं करूगाँ.”
कौआ भागता-भागता हंस के पास पहुँचा और बोला, ” हंस भाई रूको कहाँ जल मे पैड़ल मार रहें हो ? क्या पर्सन्लटी हैं तुम्हारी ….??? क्या रंग पाया हैं तुमने ? तुम तो बहुत भाग्यशाली हो. लोग तुम्हारी तारीफ में क़शीदें पढ़ते हैं. तुम तो बहुत खुश रहते होगें.”
हंस बोला, ” कौन बोला तुमको ? ये कोई रंग हैं, कफन जैसा मौत का रंग दिया हैं मुझको. तुम्हारी तरह मुझे कोई खाने पर याद नहीं करता. न मुझको अच्छी आवाज दी हैं.”
कौआ और हंस दोनों भागते हुए साधू के पास आयें. साधू से कौआ ने बोला, “भगवन ! आप हमें तोता बना दीजिए.”
साधू बोले, ” बना दूँगा, मगर शर्त वहीं हैं, एक बार तोता से दोनों मिलकर आओं.”
दोनों भागते-भागते जगंल में उस वृक्ष के पास पहुँचें जहाँ सबसे ज्यादा तोते बैठे रहते थें. जब वह दोनों वहाँ पहुँचे तो उन्हें कोई तोता दिखाई नहीं दिया. कौआ जोर-जोर से चिल्लाने लगा, तोता भाई, तोता-भाई💤💤💤 तुम कहाँ हो ?
अरे क्यों गला फाड़ रहें हो,” तोता ने बाजू वाली डाली से परेशान होते हुए कहा.”
कौआ बोला,” अरे तोता भाई ! क्या आवाज पायी हैं तुमने ? लोग तुम्हें मिठ्ठू-मिठ्ठू कहँकर पुकारतें हैं. क्या सुर्ख लाल आँखे हैं ? क्या हरे-हरे पंख हैं तुम्हारे ??? तुम तो बहुत खुश रहते होगे ?”
तोता बोला, ” कौन बोला तुमको रें…. ? तुम दोनों ने वृक्ष के पाँच चक्कर लगा दियें तब जाकर मैं दिखाई दिया. अरे जब मैं पेड़ पर बैठ जाता हूँ, तो मैं उसी में मिल जाता हूँ. मालूम ही नहीं चलता, मैं कहाँ हूँ ? अरे ऐसी आवाज का क्या फायदा जो गुलाम बनानें पर मजबूर कर दें.”
तीनों दौड़कर साधू के पास आयें और साधू को बोलें, ” हें भगवन ! हमें माफ कीजिए ! आप हमें मोर बना दीजिए !”
साधू ने फिर से वहीं शर्त रख दी और कौआ भागा-भागा मोर के पास पहुँचा.
कौआ बोला, ” मोर भाई ! आप कितने सुदंर हो. आपको नाचता देख लोग रोमाचिंत हो उठते हैं. आप देश के National bird हो. आपको तो कोई दु:ख,परेशानी नहीं हैं. आप दुनियाँ के सबसे खुशहाल पक्षी हो.”
मोर ने कहाँ,” कौन बोला’ तुमको ? कि मुझे कोई दु:ख नहीं हैं ? जरा कान लगाकर ध्यान से सुनो ! सभी ध्यान से सुनने लगे, एक आवाज आई…ठक-ठक, ठक-ठक ….ठक.’
कौआ,” यह अावाज किसकी हैं, मोर भाई ! आश्चर्य से पूँछा.”
मोर ने कहाँ, ” यह शिकारी के आने की आवाज हैं. पिछले कुछ दिनों पहले मेरे दोस्त के पंख नोच-नोच के निकाल लियें और बाजार में बेच दियें गयें. हर पल यहाँ मारे जाने का खतरा बना रहता हैं. ऐसे में कोई खुश कैसे रह सकता हैं ?”
कौआ, हंस, तोता तीनों मोर की परिस्थितियों को सुनकर सिहर उठे.
मोर ने कौआ को देखते हुए पूँछा,” तुमने ‘चिकन’ बिरयानी सुनी है ?
कौआ – हाँ, सुनी हैं.
मोर – ‘मटन’, बिरयानी सुनी हैं ?
कौआ – हाँ, सुनी हैं.
मोर – तुमने ‘कौआ’ बिरयानी सुनी हैं ?
कौआ – नहीं, सुनी हैं.
मोर – तो फिर तुम्हें खुद से क्या परेशानी हैं ? न तुम्हारा कोई शिकार करता हैं. न तुम्हें कोई गुलाम बनाता हैं. तुम आजाद होकर उड़ सकतें हो. जब किसी के घर पर जाकर आवाज लगाते हो तो लोग तुम्हें मेहमान का दूत कहँकर पुकारतें हैं. तुम्हें लोग सम्मान से खाना खिलातें हैं.
तुम्हारे साथ इतना कुछ अच्छा होता हैं. फिर भी तुम औरों में खुशियाँ तलाश रहें हो.”
कौआ, अब सब कुछ समझ चुका था. कि जो उसके पास हैं.वह किसी और के पास नहीं है. उसने खुद की अच्छाईयों पर कभी गौर ही नहीं किया था. वह साधू के पास जानें का ख्याल मन से निकाल चुका था, और खुशी-खुशी आसमानमें उड़ गया.
दोस्तों, हम उम्मीद करतें हैं, आपको कहानी पसंद आई होगी. और आशा करतें हैं, आज से आप खुद के लिए आकलन बदलेगें.
यदि राजपाल यादव ने अपनी Height को लेकर दु:ख मनाया होता और यह मान लिया होता कि ऋतिक रोशन जैसी Height न होने पर जीवन व्यर्थ हैं. तो क्या अपनी कलाकरी से मुर्दे को भी हँसा देने वाला कलाकार मिलता ??
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