जरा हटके

आपकी कीमत क्या हैं ? What are Your Values | Inspirational Hindi Article

किसी ने ठीक कहाँ हैं कि जिस प्रकार सूरज को सर्दी में सभी अहमियत देते हैं, ठीक उसी सूरज को गर्मी आने पर तृस्कार करने लगतें हैं ।” 
मतलब आपकी कीमत जरूरत पर निर्भर करती हैं । इसलिए यदि तुम्हारा कहीं मानसम्मान नहीं हो रहा हैं तो इसका मतलब साफ हैं कि अभी आपकी जरूरत नहीं हैं ।
अब ऐसी स्थिति में कई लोग Dipration के शिकार हो जातें हैं । 
उन्हें सूरज से प्रेरणा लेने की आवश्यकता हैं । क्योकि सूरज कभी तृस्कारित होकर निकलना बंद नहीं करता । वह निरतंर अपमान सहते हुए बिना रूकें अपना काम एक मिनट की देरी कियें बिना करता रहता हैं ।
जब तक कि लोग उसकी जरूरत को महसूस नहीं करतें । इसलिए हमेशा अपनी जरूरत को बनायें रखियें । 
स्वामी विवेकानंद ने कहाँ हैं :-
“जब लोग आपकी बुराई करने लगे तो बहरे हो जाओं ।”
“आपकी जरूरत ही आपकी कीमत को तय करती हैं ।”
( Your needs determine your values ) 
आपकी कीमत को बढ़ाने में सहायक एक प्रेरक कहानी |”
( inspirational story on increase your values )
एक बार की बात हैं ।बादशाह अकबर की बेगन ने बीरबल को मंत्री बनायें जाने पर प्रश्न किया ,” आप बीरबल की जगह मेरे भाई को मंत्री क्यों नहीं बना देतें ?”
अकबर ने बात को गम्भीरता से लेते हुए बेगम से कहाँ, ” मैं तुम्हारें भाई को मंत्री बना सकता हूँ मगर उससे पहलें मैं जाँचना चाहता हूँ कि तुम्हारा भाई इस योग्य हैं कि नहीं ।”
बेगम इस बात पर राजी हो गई और अगलें दिन बेगम ने अपने भाई को दरबार में बुलाया ।
         बादशाह अकबर ने लगभग तीन मीटर रस्सी का टुकड़ा देकर कहाँ, ” तुम इस टुकड़े को दस रूपयें में बेचकर आओं |”
शर्त के मुताबिक वह रस्सी का टुकड़ा बाजार में लेकर पँहुचा और कई दुकानदारों से खरीदनें के लिए आग्रह किया । दुकानदार पहले तो मना कर देते, यदि ज्यादा आग्रह करता तो कोई दो रूपये देता तो कोई तीन …|
वह जुझलाते हुए अपनी बहन के पास पँहुचा और तीन रूपये पकड़ाते हुए बोला,” अगर मंत्री नहीं बनाना है तो ना बनायें मगर इस प्रकार बेइज्जती तो ना करें , बहुत मुश्किल से तीन रूपये में उस बेकार रस्सी को बेचा हैं ।”
बेगम ने बादशाह अकबर को तीन रूपयें देते हुए गुस्से में कहाँ,”जिस रस्सी को कोई मुफ्त में भी न ले, उसे मेरे भाई ने आपकी शर्तानुसार तीन रूपयों में बेच दिया हैं । अब आप बीरबल को बेचने के लिए आदेश दें ।”
अकबर ने ठीक वैसी ही रस्सी बीरबल को पकड़ाते हुए बोले,” तुम्हें यह रस्सी बेचकर अपनी काबलियत साबित करनी हैं ।”
बीरबल वह रस्सी लेकर बाजार के लिए निकल पडे़ । रास्तें में उन्हें एक व्यक्ति दिखाई दिया । उन्होनें उसे अपने पास बुलाकर पूँछा , ” तुम कहाँ जा रहें हो ?”
उस व्यक्ति ने जवाब दिया कि मैं बाजार में मजदूरी के लिए जा रहा हूँ ।
बीरबल ने कहाँ,” कितना कमा लेते हो दिनभर में ?”
यहीं कोई तीन से चार रूपयें कमा लेता हूँ ।
बीरबल बोले,” तुम्हें मैं पूरे दस रूपयें दूँगा , बस तुम्हें मेरे साथ रहना होगा ।”
वह व्यक्ति बीरबल के साथ चलने को खुशी-खुशी तैयार हो गया ।
बीरबल ने ठीक इसी प्रकार एक व्यक्ति को और दस रूपयें  तैयार कर लिया ।
अब उनको दो व्यक्तियों को बीस रूपयें देने थे तथा साथ में अकबर को भी जाकर कुछ रूपये देने की कड़ी चुनौती थी ।
बीरबल ने बाजार में काफी देर भ्रमण किया, उसके बाद एक घनी और धनी बस्ती को चुनकर अपना कार्य आरम्भ कर दिया ।
दोनों व्यक्तियों को वह रस्सी पकड़ा दी ।  कभी दायें गली को नापतें तो कभी किसी की दुकान को आधा नापकर निशान लगा देतें ।
काफी देर तक वह यहीं करते रहें । वहाँ आपस में लोग एक दुसरे से चर्चा करने लगें कि आखिर यह व्यक्ति कौन हैं ? जो हमारी बस्ती की नाप-तौल कर रहा हैं ।
सभी लोग एकत्र होकर बीरबल से बोलें,” यह तुम क्या कर रहें हो , भाई ?”
बीरबल मुस्करातें हुए बोलें,” अरें, तुम्हें नहीं मालूम बादशाह का हुक्म हैं, वह यहाँ से नहर निकलवा रहें हैं । उसी के सन्दर्भ में मैं यहाँ नाप-तौल कर रहा हूँ ।”
बीरबल की बात सुनकर बस्ती के सभी लोग चितां में पड़ गयें । सोचनें लगें कि अब उनके घर-दुकान टूट जायेगें ।
सभी ने बीरबल के आगे हाथ जोड़ते हुए कहाँ ,” क्या कोई ऐसा उपाय नहीं हैं जो इसे टाला जा सकें ?”
बीरबल थोड़ी देर सोचते रहें …..फिर बोलें , ” आप लोग कुछ चदां इकट्ठा कर लो । मैं बाजार के बाहर का नक्शा बनाकर राजा के पास भेज दूँगा और जो चदां इकट्ठा होगा उससे मैं आप लोगों के लिए तालाब बनवा दूँगा ।”
कुछ ही देर में बीरबल को उस बस्ती से पाँच सौ रूपयें से अधिक का चंदा प्राप्त हो गया ।
उन रूपयों में से पहले बीरबल ने दोनों व्यक्तियों को दस-दस रूपयें देकर रवाना कर दिया ।
अगले दिन बाकि के रूपये ले जाकर अकबर के समक्ष रख दियें, साथ में वो रस्सी भी दें दी ।
बेगम को अब समझ आ गया था कि अकबर ने उन्हें मंत्री क्यों बनाया हुआ हैं ?
दोस्तों ! आपकी काबलियत आपकी जरूरत पैदा करती हैं और आपकी जरूरत ही आपकी कीमत तय करती हैं ।
उम्मीद करता हूँ आपको इस कहानी से कुछ सीखने को मिला होगा ।
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2 Comments

  1. इस बात में कोई दोराय नहीं है कि इंसान को जरूरत पर ही याद किया जाता है
    Y आपकी बात एक दम सत्य है

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