इसांन का व्यक्तित्व ही उसे सफल या असफल बनाता है !

दोस्तो, आज की पाँस्ट के माध्यम से हम जानेगें कि हम स्वंय जाने अजांने में किस मार्ग पर जा रहे हैं । आप में वो कौन सी आदते हैं जिन्हे आप जज ...

दोस्तो, आज की पाँस्ट के माध्यम से हम जानेगें कि हम स्वंय जाने अजांने में किस मार्ग पर जा रहे हैं । आप में वो कौन सी आदते हैं जिन्हे आप जज नहीं करते परन्तु उन्ही की वजह से आप वह हैं जो आप चाहते है या नहीं चाहते हैं । 



"सफल लोगों में वो कौन सी आदते होती हैं । जो उन्हे सफल बनाती हैं । सबसे पहले उन आदतो के बारे में जानते हैं" :-

1- दुसरो की सराहना करना :-

हम अधिकतर सराहना सुनना पसंद करते हैं लेकिन जब बात दुसरो की सराहना करने की आती हैं तो हम कतरा जाते हैं । जहाँ हम सराहना प्राप्त करने में खुशी महसूस करते हैं वही खुशी दुसरो की सराहना करने में प्राप्त नहीं होती । हम यह मान लेते हैं कि सराहना प्राप्त करना हमारे सही काम का नतीजा हैं । जो हमें मिलनी ही थी । पर हकीकत में हम यह नहीं सोच पाते कि सराहना करने वाले भी सराहना के काबिल हैं । इसलिए सफल लोग दूसरो की सराहना करने में कभी Uncomfort महसूस नहीं करते ।

2- अपनी असफलता कि जिम्मेदारी स्वंय लेना :-

जब हम सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते जाते हैं तो उसका ताज हमेशा अपने सिर पहना पसंद करते हैं परन्तु जैसे ही कही असफल हुए तो हम कोसने लगते हैं । कभी भगवान को कोसते हैं तो कभी माँ-बाप को कोशते है । तो कभी अपने भाग्य को कोसते हैं मगर जब आप असफलता की जिम्मेदारी स्वंय ले लेते हैं । तब एक नई सफलता के करीब पहुँच जाते है । अपनी असफलता मे  सकारात्मक सोच रखना तथा स्वंय की गलती को स्वीकार करना यह सिद्ध करता है कि आप अगले चरण के लिए तैयार हैं ।


3- दुसरो के प्रति आभार व्यक्त करना :-

आपका आभार शब्द आपके द्वारा ली गई सेवा का प्रतिउत्तर हैं । मैं अपनी एक छोटी सी कहानी शेयर कर रहा हूँ ।
मुझे याद है,जब माँ का आँपरेशन होना था और सही हाँस्पिटल तथा उपयुक्त शहर का चुनाव करना बहुत मुश्किल हो रहा था । तो वही दुसरी तरफ रोग बेफिक्र होकर बड रहा था । यह बात जब मैने बूआ जी को बताई तो उन्होने अपने पास आने को कहाँ । वह पूर्ण रूप से आश्वसत थी । अंत-तह अगले दिन मैं माँ को लेकर उनके पास पहुँच गया ।  अगले दिन जाकर चैक-अप कराया तथा कुछ टेस्ट किये और उसके अगले दिन डाँक्टर ने आँपरेशन कराने को कहाँ .....। 
जहाँ कल तक पिताजी अाँपरेशन को लेकर अनियोजित थे | वहीं वो आज बार -बार फोन किये जा रहे थे । मैने अनचाहे मन से उन्हे आने को बोल दिया ....। माँ का आँपरेशन चालू हो चुका था । आँपरेशन थियेटर की तरफ कई आँखो की टकटकी गेट खुलने का इतंजार कर रहीं थी.... । करीब दो घण्टे बाद डाँक्टर ने हमे खबर दी आँपरेशन सफल पूर्वक हो गया हैं । 
मैं डाँक्टर और उनके मुखी शब्दो मे समाहित ईश्वरत्व को आभार व्यक्त कर रहा था । आज पुन: मैं आभार करता हूँ बूआ- फूफा जी का जो सुबह सांम मेरे साथ रहे । मैं आभार करता हूँ उन लोगों का जो अपना अमूल्य समय निकाल कर देखने आये साथ ही उनका भी आभार जिन्होने फोन पर अपनी सवेंदनाऐ व्यक्त की । मैं आभार उन अकंल का भी करता हूँ जो कम्पाउडंर की गलती की वजह से सुई माँ के हाथ की हड्डी मे चुभ गई थी जिसकी वजह से माँ का हाथ सूज गया और असहनिय पीड़ा भी हुई । उस समय अकंल अपने बेटे को छोड़कर तुरंत दौड़कर डाँक्टर को बुलाकर लाये ।  और हाँ, मैं वो बगांली ताई को कैसे भूल सकता हूँ । जो आया का कार्य बडे ही तन्मयता से पूर्ण करती थी । मैनें जब माँ के कपड़े बदलने के लिए आग्रह किया तो उन्होनें तुरंत कपड़े बदलने में अपनी रूची दिखाई । हालाकी वह उनका ही काम था । परन्तु बात काम को तन्मयता से करने की थी । ज्यादातर स्टाफ उन्हे बेढ़ग का व्यवहार तथा अछूती निगाह से देखता था पर फिर भी वो इन सब बातो को दर किनार करके अपने काम में सल्गन रहती थी।
एक रोज तो कुछ अलग ही मन सोचने को मजबूर हो गया ।
मैने देखा, जो अछूती निगाहे उन्हे कोमल से कठोर होने पर मजबूर करती थी । आज सुबह-सुबह वह बगांली ताई हाँस्पिटल के मंदिर में भगवान की प्रतिमाऐ अपने हाथो से पोछकर उन्हे साफ कर रही थी । यह दृश्य मेरे लिए बड़ा ही रोमांचक था । मैं वो सवेदंनाऐ महसूस कर पा रहा था जो इंसान ने इंसान से बाट रखी हैं । परन्तु भगवान ने सबको एक जैसा हक दिया हैं अपनी प्रतिक्रिऐ उस तक पहुँचाने का...... ।

4- रोज कुछ नया पढ़ते है :-

सफल लोग कुछ न कुछ सीखते रहते हैं । वह हमेशा कुछ नया और Unic पढ़ने में अपना समय व्यतीत करते हैं । अगर आप रोज सुबह अखबार पढ़ते है तो आपको अपने शहर की बहुत सी चोजों के बारे में अपडेट हो जाता है । आपको पता हो जाता हैं कि बैकं आज बदं रहने वाले है या मेट्रो आज नहीं चलेगी | ऐसी बहुत सी चीजों के बारे मे हमे जानकारी मिल जाती हैं । जिसे हम बिना पढ़े नहीं जान सकते ....।
हम पढ़कर भूत और भविष्य मे झाक सकते है । इसलिए हमेशा कुछ न कुछ पढ़ते रहिये ।


5- अपने आप में सुधार लाने का नजरिया रखते है :-

अपने आप में Confidence होना अच्छी बात है मगर Overconfidence होने का मतलब है कि हम अपने आप में सुधार की गुजांइस नहीं रखते । हमें अपने कार्य मे सुधार करने का सीधा मतलब हैंं हमारे कार्य को चुनौती देना ।
एक सफल व्यक्ति अपनी गलती को स्वीकार कर उसमें सुधार की कोशिश करता हैं । 
Ex - नौकियाँ कम्पनी का आपने नाम सुना ही होगा । उन्हे अपनी customers quantity पर बहुत Confidence था मगर उन्होने अपने Product मे समय की माँग के हिसाब से सुधार नहीं किया इसी की वजह से उन्हें मार्केट से बाहर होना पड़ा ।

अब जानते हैं असफल लोगों की आदते जो उन्हे असफल बनाती हैं :-

1- उन्हे लगता हैं कि वह सब कुछ जानते हैं :-

अससफल लोगो की यह खासियत होती है कि वह स्वमेव सोच को अहमियत देते है । उनके पास हर बात का तर्क होता हैं । लेकिन हकीकत में कभी कुछ कर नहीं पाते । इन्हे अपनी सोच पर कभी मलाल नहीं होता । 
यह सुनने में कम तथा अपनी बात कहं देने में ज्यादा यकिन रखते हैं । आप अपनी बात को रख ही नही सकते उनके सामने। आपको अपनी बात रखनी हैं तो उनसे आपको बहस करनी पड़ेगी ।

2 - हकीकत से कोसो दूर होते हैं :-

उन्हें लगता है कि एक दिन वह सब कुछ पा लेगे बिना कोई लक्ष्य को साधते हुए । परन्तु उनकी यह कपोल कल्पनाओ की दुनियां होती हैं जो उन्ही के द्वारा गढ़ी गई होती है । उन्हे लगभग सभी चीजों की जानकारी होती है परन्तु परफेक्ट कुछ भी नहीं होता । वह एक समय मे कई राहों को अनगिनत साधनों की मदत से तय करना चाहते है । वह जितनी राहे चुनते जाते है उतने ही खुद के टुकड़े करते है ।

3- अपनी असफलता का श्रेय दुसरो को देते है :-

जब आप अपनी सफलता का श्रेय खुद को देते है तो आपको अपनी असफलता का श्रेय भी खुद को ही देना चाहिए ।
सफलता और असफलता आपके काम की ( Byproduct ) हैं । यह एक सिक्के के दो पहलू की तरह हैं । आपकी नाकामी किसी के सर मढ़ने से कम नहीं हो जाएगी । इसलिए दूसरो को दोष देने की वजह खुद की कमजोरीयों को ढूढ़े । 

4 - समय व्यर्थ गवाना :-

Time management पर आपको बहुत सी किताबे मार्केट में पढ़ने को  मिल जाएगी । मगर हम मे से कितने लोग उन्हे पढ़ते हैं जो लोग पढ़ते भी है वो कितना अमल करते हैं और जो अमल भी करते है वो कितना जीवन मे उतारते है ? सवाल यह है कि हम कुछ मिनट बचाकर घण्टे बर्बाद कर रहे है या मिनट खराब करके कई घण्टे बचाकर उनका सदुपयोग करते हैं ।अधिकतर देखने को यही मिलता हैं कि हम अपने समय को Misuse करते है और जब कोई उस समय का फायदा ले लेता है तब हम पछताते हैं । इसलिए अपने समय को व्यर्थ न गवाये । 

5 - कभी लक्ष्य नहीं बनाते :-

यह बात सही है कि आप जब तक कोई निश्चित लक्ष्य नहीं बनाते तब तक आपको सफलता गारंटी से नहीं मिलेगी । क्योकि यह ठीक वैसा ही है जैसे समुद्र मे बिना पायलट के जहाज को भेजना । वह कभी भी अपनी मजिंल पर नहीं पहुँच पायेगा । इसलिए अपनी जिदंगी का एक गोल जरूर बनाइये । 
"पहले कदम पर लक्ष्य और दूसरे पर असफलता तथा तीसरे कदम पर सफलता है अर्थात आप सफलता से दो कदम पीछे है ।"


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