कैसे बदंना जैन ने Talent से खड़ी की करोड़ो रूपये की कम्पनी Success Story in Hindi

'बदंना जैन' करीब दस साल पहले अपना घर छोड़कर मुम्बई पढ़ने आई | वह अपनी पढ़ाई के लिए बाहर निकलने वाली पहली लड़की थी | आज बदंना succes...

'बदंना जैन' करीब दस साल पहले अपना घर छोड़कर मुम्बई पढ़ने आई | वह अपनी पढ़ाई के लिए बाहर निकलने वाली पहली लड़की थी | आज बदंना successful business woman हैं | Decoration of furniture बनाने वाली कम्पनी की Founder हैं | खास बात यह हैं कि उनके द्वारा बनाएं फर्नीचर और सजावटी सामान गत्ते के बने होते हैं | जो पूरी तरह से Eco friendly माने जाते हैं | इस business की शुरूआत बदंना ने 13000 रूपये से की थी और आज उनकी कम्पनी का revenue 1 करोड़ के पार पहुँच गया हैं | उनकी कम्पनी का नाम "sylvan studio " हैं | 
बदंना का परिवार काफी बड़ा था | ठाकुरगंज गॉव में अपने 50 सदस्यों वाले परिवार में रहती थी, पढ़ाई के लिए केवल लड़के ही बाहर भेजे जाते थे | लड़कियॉ वहॉ के किसी स्थानिय स्कूल या कॉलेज में admission लेती थी, या फिर वह अपनी पढ़ाई छोड़ देती थी |
इसके बाद लड़कियों की शादी कर दी जाती थी | बदंना भी उन्ही लड़कियों में से एक थी |
2008 में उनकी शादी कर दी गई |
इसके बाद ही बदंना को मुम्बई जाने का मौका मिला | उन्हे बचपन से ही कला का शौक था | वह दुर्गा पूजा के दौरान पंड़ाल में जाती थी और वहॉ सजावट का काम किया करती थी |
दुर्गा माँ की मूर्ति देखकर वह बहुत खुश होती थी और उसे बनाने वाले कारीगर से मिलना भी चाहती थी लेकिन उन्हें यह मौका कभी नहीं मिला | बाद में जब वह बड़ी हुई तो उन्होनें आर्ट के क्षेत्र में काम करने का मन बनाया लेकिन उनके घर से उन्हें अनुमति नहीं मिली | 
मुम्बई के famous आर्ट स्कूल "JJ school of arts" के बारे में जानने का मौका मिला मगर वह पढ़ाई के लिए वहॉ नहीं जा सकती थी | 


 बदंना बताती हैं कि उन्होनें सिर्फ आठवी तक स्कूल की पढ़ाई की | उसके बाद वह सिर्फ परिक्षा देने के लिए स्कूल जाती थी | इतना ही नहीं 16 साल की उम्र में उनकी शादी की बात चलने लगी थी लेकिन जिदंगी में कुछ करने की हसरत ने उन्हें आज यहॉ पहुँचा दिया | 
बदंना कम उम्र में शादी नहीं करना चाहती थी | वह पढ़ना चाहती थी और आर्ट के क्षेत्र में कुछ करना चाहती थी लेकिन उनके घर वाले इसके लिए राजी नहीं थे | बाद में उन्होने किसी तरह अपने घर वालो को मना लिया | 
उसके बाद उन्होने दिल्ली जाने का पूरा मन बना लिया | इसी दौरान दिल्ली जाने के दो दिन पहले उनकी मॉ को "brain hemorrhage" हो गया और उन्होने दिल्ली जाने का प्लान cancel कर दिया |
एक महिने बाद ही बदंना की मॉ का देहान्त हो गया | इस घटना से बदंना को काफी आघात हुआ और वह पूरी तरह से टूट गई | 
बदंना के दो छोटे भाई थे और दो बहनों की शादी हो गई थी जो दिल्ली में रहती थी | उनके घर में मॉ की सारी जिम्मेदारी उन्हें सभांलनी पड़ी | वो घर में सभी को खाना बनाती और घर के सारे काम भी निबटाती थी | 
कुछ समय बाद उन्हें दिल्ली जाने का मौका मिला और उनकी मुलाकात मनीष से हुई | उन्होने सोचा शादी के बाद शायद उन्हें आजादी मिले और उन्होनें मनीष से शादी कर ली |  
उस वक्त मनीष IIM लखनऊ से पढ़ाई कर रहें थे बाद में मनीष ने मुम्बई में जॉब खोजी और वह वहॉ सेटल हो गये |
         बदंना के पति मनीष एक काँर्पोरेट कम्पनी में काम करते थे | कुछ दिनों बाद उन्होनें एक घर खरीदा.......घर सजाने की पूरी जिम्मेदारी बदंना के कंधो पर आ गई | बदंना के पास ढ़ेर सारा वक्त था, उसका इस्तेमाल वो घर सजाने में करती थी | 
उन्होनें कुछ हटकर करने का सोचा और सामान को पैक करने वाले गत्ते का इस्तेमाल किया पर उन्हे अच्छी quality का गत्ता नहीं मिल रहा था | 
अच्छे गत्ते को ढूढ़ने के लिए वो भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाया करती थी और कबाड़ी वालो से भी मिला करती थी | आखिरकार बदंना को गत्ता मिल गया | उसको काटना मुश्किल हो रहा था फिर भी उन्होने किसी तरह गत्ते से कुर्सी बनाई | 
जिसे देखने के बाद उन्हे लगा, यह आइडियॉ सही नहीं हैं | 
इसी दौरान उन्होने अपने एक दोस्त से इसके बारे में पूँछा.........?
उसने बदंना की बनाई हुई कुर्सी की काफी तारीफ की..... और उसे improve करने के लिए कुछ आइडियॉ भी दिये... | 
यह सुनकर बदंना का confidence और बढ़ गया | इसके बाद उन्होने "sylvon studio" नाम से कम्पनी खोल ली | जिसका नाम Syvantion से लिया गया हैं | जो रोमन लकड़ी होती हैं जो जगंलो को सुरक्षित रखती हैं | 
बदंना ने यह नाम इसलिए रखा क्योकि उन्हें पर्यावरण से भी लगाव था | 
बदंना ने उस गत्ते से हैन्ड़ी क्राफ्ट लैम्प और फर्नीचर भी बनाना शुरू किये | 
उन्होने शादी से लेकर घर सजाने का  Eco friendly सामान बनाना शुरू कर दिया | 
बदंना कहती हैं, 'आप ग्राहको को सिर्फ सामान ही नहीं देते बल्कि उन्हे आर्ट का पीस भी देते हैं |"
वो महिलाओ को रोजगार भी देती हैं | ऐसी बहुत सी महिलाऐं काम करती हैं जो financial काफी कमजोर होती हैं | 
वो बिहार की महिलाओं को याद करती हैं, तो कहती हैं, ' कि महिलाओं को आत्म निर्भर होना बहुत जरूरी हैं | |"
वो कहती हैं, ' कि मैं बिहार की जिस जगह से आती हूँ वहॉ महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं होती हैं |"
उनके talent की कद्र नहीं की जाती हैं इसलिए महिलाओं के लिए काम देना मेरे दिल के काफी करीब हैं |
बदंना ने गत्ते से ही बहुत सारे लेम्प बनाये और उन्हें घर में सजाने के लिए रख दिया | 
जब बदंना ने अपने  दोस्तों को बुलाकर दिखाया तो सबने उनके काम की तारीफ की | 
इसके बाद बदंना ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा | 
उन्होने MC Donald और Raymond जैसी कम्पनियों के लिए भी सामान बनायें हैं | 
उन्होनें खुद की बेवसाइट बनाई जिस पर अपनी कम्पनी के सामान बेचती हैं | आज बदंना successful business woman हैं | आज उनका सालाना टर्नओवर करोड़ रूपये के पार होता हैं |

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