मैं तो नसीब का खाती हूँ | Motivational Story in Hindi

दोस्तों , आज मैं एक motivational कहानी आप लोगों के लिए लाया हूँ | आपने अपने आस-पास कई ऐसे लोग देखे होगें जो दिन - रात काम करने के बावजूद प...

दोस्तों , आज मैं एक motivational कहानी आप लोगों के लिए लाया हूँ |
आपने अपने आस-पास कई ऐसे लोग देखे होगें जो दिन - रात काम करने के बावजूद परेशानी और गरीबी में दिन गुजारने पर मजबूर होगें | इसके पीछे का क्या कारण हैं ? जो इतनी मेहनत करने के बावजूद भी कभी सुकून की जिदंगी नही जी पाते |


      आपने अक्कसर कहते सुना होगा कि गरीब , गरीब होता चला जा रहा हैं और अमीर , अमीर होता चला जा रहा हैं | मैं आपको आज ऐसी कहानी लेकर आया हूँ | आप अन्त तक पढ़िये |
     एक गाँव में एक सेठ़ रहता था | उसका कपास का धंधा था जो काफी अच्छा चलता था | उसकी  तीन बेटियॉ थी | एक दिन उसने अपनी तीनों बेटियों को बुलाया और कहॉ , " तुम तीनो को मैनें यहॉ इसलिए बुलाया है ताकि जो मेरे मन में सवाल आ रहा है उसका जवाब मैं तुम तीनो से जान सकू | "

बड़ी लड़की बोली - पर ऐसी क्या बात है ? जो आप हम तीनो से पूँछना चाहते हैं |
सेठ ने बड़ी लड़की की तरफ इसारा करते हुए कहॉ ," तुम मुझे बताओ की तुम किसके भाग्य का खाती हो ?"
इस पर बड़ी लड़की ने  कुछ सोचते हुए कहॉ ," मैं तो आपके भाग्य का खाती हूँ |"

सेठ मुस्कराया और यही सवाल बीच वाली लड़की से किया तो उसने भी बड़ी बहन की बात मे सहमती जताते हुए कहॉ ," हॉ मैं भी आपके भाग्य का खाती हूँ |"

सेठ के चहरे पर मुस्कान की रफ्तार और दोगनी हो गई |  सिर खुजलाते हुए तीसरी बेटी से बोला - बेटी तुम भी अपनी दोनों बड़ी बहनों की बात से सहमत हो |
छोटी लड़की  सोच विचारते हुए बोली , " पिताजी मैं तो अपने नसीब का खाती हूँ | "
       सेठ को अपनी छोटी लड़की का जवाब नाकवार गुजरा | उसके चहरे की मुस्कान पूरी तरह गायब हो चुकी थी |
उस दिन के बाद वो छोटी लड़की से नफरत करने लगा | धीरे - धीरे समय गुजरता हैं | दोनों बड़ी लड़कीयों की शादी अच्छे घरो मे कर देता हैं |
जब बड़ी लड़कियॉ घर मे थी तब तक तो वो घर का सारा काम मिलकर कर लिया करती थी | अब घर का सारा काम अकेले ही छोटी लड़की को करना पड़ता था | उसके बाद भी सेठ कभी खुशी से दो शब्द अपनी बेटी के लिए नहीं कहता था |
          सेठ को वही बात खाये जा रही थी कि उसकी बेटी उसका नही वह अपने भाग्य का खाती है इसलिए उसने अब तय कर लिया कि इसकी बात का जवाब तो देना ही पड़ेगा |
उसने अपनी छोटी लड़की की शादी एक गरीब लकड़हारे के साथ कर दी |
शादी करने के बाद उसने अपनी छोटी लड़की का हाल चाल भी कभी नही पूछॉ | सेठ मन ही मन  काफी खुश  था |
समय बीतता है | उधर छोटी लड़की ने देखा कि उसके पिता ने एक गरीब घर मे शादी कर दी है मगर इसकी शिकायत लेकर वो अपने पिता के पास नही गई |
उसने अपने पति से पूँछा , " आप सुबह को घर से निकल जाते हो और देर साय को वापस आते हो फिर भी आमदनी नही हो रही हैं आखिर इसकी वजह क्या है ? "
उसके पति लकड़हारे ने कहॉ - मैं चदंन की लकड़ी काटकर शहर ले जाकर एक बनिये को बेचता हूँ मगर फिर भी मैं कुछ नही कर पा रहा हूँ अब तुम ही बताओ मैं क्या करू ?"
उसकी पत्नी बोली - कल जब आप बाजार जाओगें तो मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी |
अगले दिन  पति - पत्नी दोनो साथ गये | पत्नी ने पहले शहर मे जाकर चदंन की लकड़ी का पिछले एक साल के भाव मालूम किये तो पता चला उसके पति को बनिये ने बाजार मूल्य से  कम मूल्य पर वो लकड़ी को खरीद रहा था |
      दिन तो उनका ऐसे ही चला गया था बाजार भाव में | अगले दिन आकर बिनिये से उसकी पत्नी ने कहॉ , " पूरे एक साल से आप मेरे पति से बाजार भाव से कम दाम पर लकड़ी खरीद रहे है इसलिए आप या तो हिसाब करो नही तो जेल जाने को तैयार रहो | "
यह सब सुनकर बनियॉ घबरा गया | और बोला - देखो आप पुलिस  कार्यवाही मत करो मैं आपका सारा हिसाब कर देता हूँ |
बनिये ने सारा हिसाब अपनी बही मे देखकर कर दिया | अब उनके पास काफी पैसे एक साथ आ चुके थे उनमे से कुछ पैसो से एक बैलगाड़ी खरीदी और बाकी बचे पैसो से घर की और जरूरत की चीजे ले ली |
अब वो रोज पहले से ज्यादा लकड़ी लेकर जाने लगा तथा उस लकड़ी का दाम भी सही मिलने लगा | देखते ही देखते वह काफी पैसो वाला हो गया | फिर उन पैसो से बाजार मे मकान खरीद लिया | अब उनकी जिदंगी पटरी पर दौड़ भर रही थी |
उधर उस सेठ को धंधे मे नुकसान हो गया और देखते ही देखते उसका धंधा बिल्कुल ठप्प हो गया | वह मदद के लिए अपनी अमीर घर मे बिहाई दोनों लड़कियों के पास गया मगर किसी ने भी मदद का हाथ नही बढ़ाया | और ना ही उन्होने अपने पिता का आकर कभी हाल लिया |
      सेठ पेट पालने के लिए सूप बेचने लगा | एक दिन वह सूप बेचने उसी बाजार मे पहुँच गया जिस बाजार मे उसकी छोटी बेटी रहती थी |
उसने उसी गली मे जाकर  आवाज लगाई -सूप ले लो - सूप ले लो .......|
उसकी बेटी ने जब आवाज सुनी तो वो दौड़कर घर से बाहर आई तो वह देखते ही पहचान गई कि यह तो उसके पिता है |
वह बुलाकर अपने घर ले गई | पहले तो पानी पिलाया फिर खाना खिलाया |
सेठ समझ ही नही पा रहा था कि कोई अजांन लड़की उसकी इतनी खातर आखिर क्यो कर रही हैं |
जब सेठ ने खाना खा लिया तो लड़की सेठ का पूरा पता और उसकी तीन बेटियों की बात बताने लगी |  सेठ अब भी नही समझ पा रहा था कि आखिर यह लड़की उसके बारे मे इतना कुछ जानती कैसे है ? क्योकि उसे पता था कि वो अपनी लड़की की शादी टुटे - फूटे घर मे कर के आया था यह तो किसी बड़े घर की लड़की है |
आखिर सेठ ने पूँछ ही लिया - तुम कौन हो मैने पहचाना नही |
लड़की बोली - मैं आप ही की बेटी हूँ |
इतना सुनते ही सेठ के आँखो से पानी की धार फूट पड़ी | वह समझ चुका था कि सब अपने भाग्य का खाते है |
    
     दोस्तो , मेहनत तो हम सब करते है और बिना मेहनत किये किसी को कुछ हासिल भी नहीं होता मगर कही न कही हमें कर्म और भाग्य को भी समझना होगा |
कहने का तात्पर्य है कि "सही कर्म करके हम अच्छे भाग्य का निर्माण कर सकते है |"

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